मेहनत के प्रति मन मै अपने श्रद्धा हमेशा बनाए रखना जिंदगी मे बस इंसानियत को ही अपना उसूल बनाए रखना !

मेहनत के प्रति मन मै अपने श्रद्धा हमेशा बनाए रखना जिंदगी मे बस इंसानियत को ही अपना उसूल बनाए रखना !

Insaniyat Shayari

आज लाखों डिग्रीयां हो गई है कॉलेजों में मगर इंसानियत का पाठ अब कोई नहीं पढ़ता।

आज लाखों डिग्रीयां हो गई है कॉलेजों में मगर इंसानियत का पाठ अब कोई नहीं पढ़ता।

हो अगर जिमे पर अपने उस कर्ज को जरूर जुदा करना जिंदगी मे अपने इंसानियत का फर्ज जरूर अदा करना !

हो अगर जिमे पर अपने उस कर्ज को जरूर जुदा करना जिंदगी मे अपने इंसानियत का फर्ज जरूर अदा करना !

अगर मोहब्बत की हद नहीं कोई, तो दर्द का हिसाब क्यूँ रखूं।

अगर मोहब्बत की हद नहीं कोई, तो दर्द का हिसाब क्यूँ रखूं।

इंसानियत की राह पर तुम्हे चलना होगा ठोकरे खाकर ही ​भी तुम्हे संभलना होग.

इंसानियत की राह पर तुम्हे चलना होगा ठोकरे खाकर ही ​भी तुम्हे संभलना होग.

घरों पे नाम थे नामों के साथ ओह दे थे बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला

घरों पे नाम थे नामों के साथ ओह दे थे बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला

अंधो की दुनिया मे गूंगी जुबान हो गई बहरे लोग है यहां तभी तो इंसानियत तबाह हो गई !

अंधो की दुनिया मे गूंगी जुबान हो गई बहरे लोग है यहां तभी तो इंसानियत तबाह हो गई !

इंसान ही आता है काम इंसान के
मददगार कोई फरिश्ता नही होता
यह सच्चाई जान ले ऐ दोस्त इंसानियत
से बड़ा कोई रिश्ता नही होता.

इंसान ही आता है काम इंसान के मददगार कोई फरिश्ता नही होता यह सच्चाई जान ले ऐ दोस्त इंसानियत से बड़ा कोई रिश्ता नही होता.

बहुत से कागज़ मिल जाते हैं एक खासियत बेच कर, लोग पैसा कमाते हैं आज कल इंसानियत बेच कर।

बहुत से कागज़ मिल जाते हैं एक खासियत बेच कर, लोग पैसा कमाते हैं आज कल इंसानियत बेच कर।

इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ।

इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ।

बनाया ऐ ‘ज़फ़र’ ख़ालिक़ ने कब इंसान से बेहतर मलक को देव को जिन को परी को हूर ओ ग़िल्माँ को

बनाया ऐ ‘ज़फ़र’ ख़ालिक़ ने कब इंसान से बेहतर मलक को देव को जिन को परी को हूर ओ ग़िल्माँ को

इंसानियत तो एक है मजहब अनेक है ये ज़िन्दगी इसको जीने के मक़सद अनेक है !

इंसानियत तो एक है मजहब अनेक है ये ज़िन्दगी इसको जीने के मक़सद अनेक है !

हर आदमी होते हैं दस बीस आदमी जिसको भी देखना कई बार देखना।

हर आदमी होते हैं दस बीस आदमी जिसको भी देखना कई बार देखना।

इंसानियत की रोशनी गुम हो गई कहा साए तो है आदमी के मगर आदमी कहा !

इंसानियत की रोशनी गुम हो गई कहा साए तो है आदमी के मगर आदमी कहा !

मेरी जबान के मौसम बदलते रहते है मै तो आदमी हूं मेरा ऐतबार मत करना !

मेरी जबान के मौसम बदलते रहते है मै तो आदमी हूं मेरा ऐतबार मत करना !

मेरी जबान के मौसम बदलते रहते हैं, मैं तो आदमी हूँ मेरा ऐतबार मत करना।

मेरी जबान के मौसम बदलते रहते हैं, मैं तो आदमी हूँ मेरा ऐतबार मत करना।

खुदा न बदल सका आदमी को आज भी यारों, और आदमी ने सैकड़ो खुदा बदल डाले।

खुदा न बदल सका आदमी को आज भी यारों, और आदमी ने सैकड़ो खुदा बदल डाले।

इंसानियत दिल मे होती है हैसियत मे नही उपरवाला कर्म देखता है वसीयत नही !

इंसानियत दिल मे होती है हैसियत मे नही उपरवाला कर्म देखता है वसीयत नही !

आइना कोई ऐसा बना दे ऐ खुदा जो इंसान का चेहरा नही किरदार दिखा दे !

आइना कोई ऐसा बना दे ऐ खुदा जो इंसान का चेहरा नही किरदार दिखा दे !