दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन।

अब नींद से कहो हम से सुलह कर ले फ़राज़, वो दौर चला गया जिसके लिए हम जागा करते थे।

अब तो खुद को भी निखारा नहीं जाता मुझसे, वे भी क्या दिन थे कि तुमको भी संवारा हमने।

कैसे बनाऊँ तेरी यादों से दूरियां, दो कदम जाकर सौ कदम लौट आती हूँ ।

बस एक भूलने का हुनर ही तो नहीं आता, वरना भूलना तो हम भी बहुत कुछ चाहते हैं !

दास्तां सुनाऊं और मज़ाक़ बन जाऊँ बेहतर है मुस्कुराऊं और ख़ामोश रह जाऊँ।

अकेले कैसे रहा जाता है, कुछ लोग यही सिखाने हमारी जिंदगी मे आते है।

कोई तो कर रहा है मेरी कमी पूरी तभी मेरी याद उसे अब नहीं आती।

रोज रोते रोज ये कहती है जिंदगी मुझसे, सिर्फ एक शख्स की खातिर यूँ मुझे बर्बाद ना कर।

जो कहते थे मुझे डर है कहीं मैं खो न दूँ तुम्हे, सामना होने पर मैंने उन्हें चुपचाप गुजरते देखा है।

कुछ तो रहम कर ऐ जिन्दगी हम कौन से यहाँ बार बार आयेंगे !

कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़, ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया।

नींद आएगी तोह इस तरह सोयेंगे मुझे जगाने के लिया लोग रोयेंगे ।

तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी, और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गई हूँ।

मेरे ज़ज्बात की कदर ही कहाँ, सिर्फ इलज़ाम लगाना ही उनकी फितरत है !

आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं, आंख बरसे तो क्या किया जाए।

मुझे भी अब नींद की तलब नहीं रही, अब रातों को जागना अच्छा लगता है।

ख़ामोशी बहुत कुछ कहती हे कान लगाकर नहीं, दिल लगाकर सुनो।

मुझे ये ‎ दिल‬ कि बीमारी‬ ना होती ‎अगर‬ तू इतनी ‎प्यारी‬ ना होती।

उनको लगी खरोंच का पता पुरे शहर को है, हमारे गहरे जख्म की कहीं चर्चा तक नहीं !

आज परछाही से पूछ ही लिया हमने, क्यों चलते हे मेरे साथ, उसने ने भी हसकर कहा, और कोण हे तेरे साथ।

जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना, तोह फिर पनाह कही नही मिलती।

मोहब्बत के सफ़र में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई।

काश ये दिल बेजान होता, न किसी के आने से धडकता, न किसी के जाने से तडपता।

यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी, ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो।

चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, कही कह ना दे की ये हक़ तुम्हे किसने दिया।

साजिशो का पहरा होता हे हर वक्त रिश्ते भी बेचारे क्या करे टूट जाते हे बिखर कर।

याद तो रोज करते है उन्हें , पर उन्होने कभी महसूस ही न किया।

उसने‬ कहा तुम सबसे ‪‎अलग‬ हो, सच‬ कहा और कर दिया मुझे सबसे अलग।

हर रोज़, हर वक़्त तुम्हारा ही ख्याल ना जाने किस कर्ज़ की किश्त हो तुम।

मुझे इसलिए भी लोग कमज़ोर समझते है, मेरे पास ताक़त नहीं किसी का दिल तोड़ने की।

कैसे गुज़र रही है सब पूछते है, कैसे गुजारता हु कोई नहीं पूछता |

दो पल भी नहीं गुज़रते तुम्हारे बिन, ये ज़िन्दगी ना जाने कैसे गुज़ारेंगे!

उस दिन चैन तो तुम्हारा भी उड़ेगा, जिस दिन हम तुम्हे लिखना छोड़ देंगे।

दर्द सिर का हो या दिल का, दोनों बहुत बुरे होते है।

न जख्म भरे, न शराब सहारा हुई, न वो वापस लोटे, न मोहब्बत दोबारा हुई।

कभी ये मत सोचना की याद नहीं करते , हम रात की आखिरी और सुबह की पहली सोच हो तुम।

अकेले रहने का भी एक अलग सुकून हे | ना किसी के वापस आने की उम्मीद, ना किसी के छोड़ जाने का डर।

क़ाश कोई ऐसा हो, जो गले लगा कर कहे, तेरे दर्द से मुझे भी तकलीफ होती है

वो मुजे नफ़रत करें या प्यार करें मैं तो एक दीवाना हूँ।

चुप रहना मेरी ताक़त है कमज़ोरी नहीं, अकेले रहना मेरी चाहत है, मजबूरी नहीं।

रात नई हैं,यादें पुरानी!

अब तो वक्त ही उसे बतायेगा, की कितने कीमती थे हम !

अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।

कुछ नहीं लिखने को आज, न बात , न ज़ज्बात।

इस छोटी सी उम्र में कितना कुछ लिख दिया मैंने, उम्रें लग जायेंगी, तुम्हे मुझे पूरा पढ़ने में।

बेशक तेरे Phone की कोई उम्मीद तो नहीं लेकिन, पता नहीं क्या सोचकर, मैं आज भी Number नहीं बदलता।

बात इतनी है के तुम बहुत दुर होते जा रहे हो, और हद ये है कि तुम ये मानते भी नही।

बहुत भीड हो गई है लोगों के दिलों में, इसलिए आजकल हम अकेले ही रहते हैं !

मुझे इसलिए भी लोग कमज़ोर समझते है , मेरे पास ताक़त नहीं किसी का दिल तोड़ने की।

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