गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई ।

हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था।

दो गज से जरा ज़्यादा जगह देना कब्र में मुझे, किसी की याद में करवट बदले बीना मुझे नीद नही आती।

एक बार कह कर तो देखा होता कि तुम किसी और की हो, भगवान की कसम तेरी परछाई से भी दूर रहते।

इतना भी ना चाहो किसी को वो चला जाये और ज़िन्दगी बेरंग और गुमनाम हो जाए. ।

उसको बेवफा कहकर अपनी ही नजर में गिर जाते है हम, पर प्यार भी वो अपना था, और वो पसंद भी अपनी थी।

सच कहूँ आज पहली दफा लगा की दूरियाँ बड़ी ज़ालिम हैं।

बेताब हम भी थे दर्द जुदाई की कसम, रोती वो भी होगी नज़रें चुरा चुरा कर…।

मैंने डॉक्टर से कहा मोहब्बत की दर्द का दवा दो, डॉक्टर ने हँस कर कहा थोड़ी-थोड़ी जहर पिया करो।

ना अपने पास हूं ना तेरे साथ हूं, बहुत दिनों से मैं यूं ही उदास हूं !

किसी से नाराजगी इतने वक्त तक ना रखो कि वह तुम्हारे बगैर ही जीना सीख जाए…।

तुमसे दिल लगा कर देख लिया अब और क्या देखने को बाक़ी है |

कौनसा अंदाज़ है ये तेरी महोब्ब्त का, ज़रा हमको भी समझा दे, मरने से भी रोकते हो, और जीने भी नहीं देते !

आज जिस्म मे जान है तो देखते नही हैं लोग, जब रूह निकल जाएगी तो कफन हटाहटा कर देखेंगे लोग।

आँख बंद करके चलाना खंजर हम पे, कहीं हमने मुस्कुरा दिया, तो कत्ल़ तुम्हारा होगा।

थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता. ।

मायने खो देते हैं वो जवाब, जो वक्त पर नहीं मिलते !!

मरने के नाम से जो रखते थे मुँह पे उँगलियाँ, अफ़सोस वही लोग मेरे दिल के क़ातिल निकले।

बहुत सजा पाई है मैंने वफ़ा निभाने की अब, ना रोने की ताकत है न जागने की हिम्मत।

उसके लिए क्यों रोता है यार, जो जाने ही न क्या होता है प्यार।

रूठना तेरा लाज़मी था हर बार मनाने की आदत जो हमने डाली थी।

तेरी आँखों से यूँ तो सागर भी पिए है मैंने, तुझे क्या खबर जुदाई के दिन कैसे जिए है मैंने।

जब से वो मशहूर हो गये हैं, हमसे कुछ दूर हो गये हैं…

कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है।

हद से बढ़ जाये तालुक तो गम मिलते हैं, हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते हँ..

कुछ अलग सा है अपनी मोहब्बत का हाल, तेरी चुपी और मेरा सवाल ....!!!!

उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से, अब नयी दुनिया लाये कहाँ से।

कभी कभी हम गलत नहीं होते, बस वो शब्द ही नहीं होते जो हमें सही साबित कर सके।

अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास, अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही !

कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये।

तकलीफ ये नही की किस्मत ने मुझे धोखा दिया,अफसोस तो ये हे की मेरा यकीन तुम पर था किस्मत पर नही।

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का,रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है।

वो खुस है इतनी कि अब जी नही करता कि उ्स्से पूछू कि हमारी याद आती है या नही. ।

कहीं बाजार में मिल जाये तो लेते आना वो चीज़ जिसे दिल का सुकून कहते हैं।

मोहब्बत के बाद मोहब्बत मुमकिन होती है, पर टूट कर चाहना सिर्फ एक बार होता है।

रिश्ते नाते सब मतलब के यार है, बस पैसा ही सबका सच्चा प्यार है. ।

रोया नहीं रुलाया गया हूँ मैं, बना के पसंद फिर ठुकराया गया हूँ मैं !

बड़ी अजीब सी हैं शहरों की रौशनी, उजालो के बाद भी लोगों को पहचानना मुश्किल है.. ।

तमाशा बन गयी है ज़िन्दगी कुछ कहे तो भी बुरे और कुछ न कहे तो भी बुरे।

वो हर बात मुझसे छुपाने लगे हैं, वो मेरे हिस्से का वक्त किसी और के साथ बिताने लगे हैं।

गलती से कहो या खुदा की मर्ज़ी से, बेशुमार ग़म मिला बिना किसी अर्ज़ी के .. ।

इस जहान में कब किसी का दर्द अपनाते हैं लोग रुख हवा का देखकर अक्सर बदल जाते हैं लोग।

लगता है आज जिंदगी कुछ खफा है, चलिए छोड़िए कौन सी पहली दफा है.. ।

जिस सच को सही वक़्त पर बताया नहीं जाए, वह झूठ बन जाता है. ।

मैं बैठूंगा जरूर महफ़िल में मगर पियूँगा नहीं क्योंकि मेरा गम मिटा दे इतनी औकात शराब में नहीं.. ।

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो, और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया।

मुस्कुराना तो सीखना पड़ता हैं, रोना तो लोग सीखा देते हैं.. ।

नाराज़ होने का शौक भी पूरा कर लो तुम लगता है हम तुम्हें ज़िन्दा अच्छे नहीं लगते।

सब समेट कर बढ़ते रहना, नदियों तुमसे सीख न पाया !

उसने कहा भूल जाओ मुझे, हमने कह दिया, कौन हो तुम ?

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