गम में डूबी मेरी हर आहें है, मंजिल का पता नहीं और काँटों भरी राहें है। - Manzil Shayari

गम में डूबी मेरी हर आहें है, मंजिल का पता नहीं और काँटों भरी राहें है।

Manzil Shayari