Tareef Shayari, Status, and Images in Hindi

आँखो मे आँसुओ की लकीर बन गई जैसी चाहिए थी वैसी तकदीर बन गई !

एक उम्र है जो तेरे बगैर गुजारनी है और एक लम्हा है जो तेरे बगैर गुज़रता नही !

हुस्न वालो को संवरने की क्या जरूरत है वो तो सादगी मे भी क़यामत की अदा रखते है !

मेरे मिजाज की क्या बात करते हो साहब कभी-कभी मै खुद को भी जहर लगती हूं !

आसमा मे खलबली है सब यही पूछ रहे हैं कौन फिरता है ज़मी पे चाँद सा चेहरा लिए !

वो तारीफे करते रहते है हम शायरी करते रहते है वो कुछ कहते नही ओर हम इंतज़ार करते रहते है !

अपना इक-इक वादा इस तरह निभाना है तुम को मेरे आँगन मे चाँद बन के आना है !

मुझे दुनिया की ईदो से भला क्या वास्ता यारो हमारा चाँद दिख जाये हमारी ईद हो जाये !

काटे नही कटते लम्हे इन्तजार के नजरे बिछाएं बैठे है रास्ते पे यार के !

कैसे बयान करे सादगी अपने महबूब की पर्दा हमी से था मगर नजर भी हमी पे थी !

उनकी एक मुस्कराहट ने हमारे होश उड़ा दिए हम होश मे आ ही रहे थे की वो फिर मुस्कुरा दिए !

तेरी तरफ जो नजर उठी वो तापिशे हुस्न से जल गयी तुझे देख सकता नहीं कोई तेरा हुस्न खुद ही नकाब हैं.

मेरी आँखों को जब उनका दीदार हो जाता है, दिन कोई भी हो मेरे लिए त्यौहार हो जाता है।

तेरे हुस्न को परदे कि जरुरत क्या है कौन रहता है होश में तुझे देखने के बाद !

उसका चाहा तो मोहब्बत की तारीफ नज़र आयी, वार्ना इस शब्द की तो सिर्फ तारीफ सुना करते थे।

हम आज उसकी मासूमियत के कायल हो गए, उसकी सिर्फ एक नजर से ही घायल हो गए।

दुनिया मे तेरा हुस्न मेरी जान सलामत रहे सदियो तक जमी पे तेरी कयामत रहे !

तारीफ अपने आप की करना फ़िज़ूल है खुशबू खुद बता देती है कौन सा फूल है।

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा, लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं।

लाजवाब हुस्न रंगीन मौसम सांझ है तेरी चाल मे तू परी है जन्नत से उतरी हम पागल है हर हाल मे !

सब हे तारीफ करते है मेरी शायरी कभी कोई नहीं सुनता मेरे लफ़्ज़ों की सिसकियाँ।

तुमको देखा तो मुझे मोहब्बत समझ में आयी, वरना औरों से ही तुम्हारी तारीफ सुना करते थे।

चांद को बहुत गुरूर था उसकी खूबसूरती पर तोड़ दिया हमने तुम्हारी तस्वीर दिखा कर !

जो लव्स तेरी तारीफ करते नहीं थकते थे आज वो तेरा नाम तक नहीं लेना चाहते है।

गिरता जाता है चहरे से नकाब अहिस्ता-अहिस्ता, निकलता आ रहा है आफ़ताब अहिस्ता-अहिस्ता।

ऐसी कोई तारीफ ही नही है जो तुम्हारी तारीफ कर सके !

सब तारीफ कर रहे थे अपने प्यार की हम नींद का बहाना दे कर महफ़िल छोड़ आये।

ममता की तारीफ न पूछिए साहब, वक्त आने पर चिड़िया सांप से लड़ जाती है।

नही भाता अब तेरे सिवा किसी और का चेहरा तुझे देखना और देखते रहना दस्तूर बन गया है !

क्या लिखों तेरी तारीफ-ए-सूरत में यार अलफ़ाज़ काम पद रहे है तेरी मासूमियत देखकर।

इज़्ज़त और तारीफ़ मांगी नहीं जाती, इसे ईमानदारी से कमाना पड़ता है।

हुस्न का बिखरा शबाब यहां हर तरफ बंद करता हूं नजर तो दिल हो जाए खराब !