Ishwar Chandra Vidyasagar Quotes, Status, and Thoughts in Hindi

दूसरों के कल्याण से बढ़कर दूसरा कोई नेक काम और धर्म नहीं होता है।

जो व्यक्ति दूसरों के काम न आये, वह वास्तव में मनुष्य नहीं है।

ध्यान करना एकाग्रता देता है, संयम विवेक देता है। शांति, संतुष्टि और परोपकार मनुष्यता देती है

जिसके अंदर विनम्रता है वही जीवन में सुखी और सफल है। और विनम्रता विद्या से ही आती है।

समस्त जीवों में मनुष्य सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। क्यूंकि उसके पास आत्मविवेक और आत्मज्ञान है।

विद्या सबसे अनमोल धन है। इसके आने मात्र से हमारा ही नहीं अपितु पूरे समाज का कल्याण होता है।

अपने हित से पहले, समाज और देश के हित को देखना एक विवेकयुक्त सच्चे नागरिक का धर्म होता है।

समाज के हित में किये गए कार्यों से बढ़कर दूसरा कोई नेक काम नहीं है। यही मनुष्य का सच्चा धर्म है।

भले ही मनुष्य कितना भी बड़ा क्यों न बन जाये। परंतु उसे हमेशा अपना अतीत याद करते रहना चाहिए।

नास्तिक व्यक्ति को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर भगवान में विश्वास करना चाहिए। इसी में उनका हित है।

अगर सफल और प्रतिष्ठित बनना है, तो झुकना सीखो। क्यूंकि जो झुकते नहीं, समय की हवा उन्हें झुका देती है।

मनुष्य का सबसे बड़ा कार्य दूसरों की भलाई और सहयोग होना चाहिए। जो कि एक समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करता है।

दूसरों के कल्याण से बढ़कर कोई नेक काम और धर्म नहीं है।

यदि कोई व्यक्ति बड़ा बनना चाहता है तो उसे छोटे – छोटे काम भी पूर्ण निष्ठा से करना चाहिए। क्योंकि स्वावलंबी ही श्रेष्ठ होता है।

जो लोग नास्तिक हैं उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ईश्वर को मानना चाहिए, इसमें उनकी रुचि होती है।

जो मनुष्य संयम के साथ, विद्या ग्रहण करता है। और अपनी विद्या से सब का परोपकार करता है। उसकी पूजा सिर्फ इस लोक में ही नहीं बल्कि परलोक में भी होती है।

अगर सफल और प्रतिष्ठित बनना है, तो झुकना सीखो। क्योंकि जो झुकते नहीं, समय की हवा उन्हें झुका देती है।