Ajnabi Shayari, Status, and Images in Hindi
सबसे ज़्यादा तकलीफ़ तब होती है जब कोई अपना ही अजनबी बन जाए।
जिसे कभी दिल की धड़कनों की वजह समझा था, वो एक दिन खामोशी से इतना दूर हो जाए कि उसकी मौजूदगी भी अजनबी सी लगे।
Ajnabi Shayari उसी बेनाम दर्द की तस्वीर है — जहाँ रिश्ता तो होता है, लेकिन अब उसमें ना वो बात होती है, ना वो एहसास।
वो लम्हें जो कभी साथ हँसते हुए बीते थे, अब सिर्फ यादों में सिसकते हैं।
एक वक़्त था जब हर बात उसी से होती थी… और आज हाल ऐसा है कि नज़रें मिल जाएं तो भी कुछ कहने को नहीं बचा।
जब दिल के सबसे करीब रहा इंसान अनजान सा व्यवहार करने लगे,
तो शायरी ही वो रास्ता बनती है जहाँ दिल अपना दर्द बेझिझक कह पाता है।
इस ब्लॉग में हम लाए हैं Ajnabi Shayari in Hindi,
जो उन सभी अधूरी बातों, बदले रिश्तों और ठंडी हो चुकी नज़रों का बयान है।
क्योंकि कुछ दूरियाँ मीलों से नहीं, रवैयों से बनती हैं — और वो अजनबीपन सबसे ज़्यादा चुभता है, जो अपनेपन के बाद महसूस होता है।

साथ बिताए वो पल फिर से भूल जाते है चल फिर से अजनबी होने का खेल दिखाते है!

सदियों बाद उस अजनबी से मुलाक़ात हुई, आँखों ही आँखों में चाहत की हर बात हुई!

एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यों है, इंकार करने पर चाहत का इकरार क्यों है; उससे मिलना तो तकदीर मे लिखा भी नही, फिर हर मोड़ पे उसी का इंतज़ार क्यों है!

अजनबी बन के हँसा करती है, ज़िंदगी किस से वफ़ा करती है, क्या जलाऊँ मैं मोहब्बत के चराग़, एक आँधी सी चला करती है।

तेरा नाम था आज किसी अजनबी की ज़ुबान पे, बात तो ज़रा सी थी पर दिल ने बुरा मान लिया!

मैं खुद भी अपने लिए अजनबी हूं, मुझे गैर कहने वाले तेरी बात मे दम है

दिल चाहता है कि फ़िर, अजनबी बन कर देखें, तुम तमन्ना बन जाओ, हम उम्मीद बन कर देखें।

उस अजनबी से हाथ मिलाने के वास्ते महफ़िल में सब से हाथ मिलाना पड़ा मुझे!

चले आओ ‘अजनबी’ बनकर फिर से मिले तुम मेरा नाम पूछो मैं तुम्हारा हाल पूछूं!

कल तक सिर्फ़ एक अजनबी थे तुम आज दिल की एक एक धड़कन की बंदगी हो तुम!

हम कुछ ना कह सके उनसे, इतने जज्बातों के बाद, हम अजनबी के अजनबी ही रहे, इतनी मुलाकातो के बाद!

वजह तक पूछने का मौका ही ना मिला, बस लम्हे गुजरते गए और हम अजनबी होते गए!

हमसफ़र की तरह वो चला था मगर, रास्ते भर रहा अजनबी अजनबी.

इस अजनबी शहर में पत्थर कहां से आया है, लोगों की भीड़ में कोई अपना ज़रूर है!

अगर तुम ✒ अजनबी हो तो लगते क्यों नहीं और अगर मेरे हो तो मिलते क्यों नहीं!

मंजिल का नाराज होना भी जायज था, हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे!

एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यों है इंकार करने पर चाहत का इकरार क्यों है उसे पाना नहीं मेरी तकदीर में शायद फिर हर मोड़ पे उसी का इंतज़ार क्यों है!

अजनबी कोई समझ लेता है, कोई अन्जान समझ लेता है, दिल है दीवाना, हर तबस्सुम को जान पहचान समझ लेता है.

इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर!

अजनबी शहर में एक दोस्त मिला, वक्त नाम था पर जब भी मिला मजबूर मिला!

मैं तो खुद अपने लिए अजनबी हूँ तू बता मुझ से जुदा हो कर तुझे कैसा लगा!

हमसे मत पूछो यारो उनके बारे मे, अजनबी क्या जाने अजनबी के बारे मे.