Berukhi Shayari in Hindi – जब नज़रों से दूर हो दिल
कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसे लम्हे आ जाते हैं जब सबसे क़रीबी इंसान ही सबसे दूर लगने लगता है। जिस नज़र ने कभी हमें सबसे ख़ास महसूस कराया था, वही नज़र जब बेरुख़ी से मुंह मोड़ लेती है, तो दिल की दुनिया वीरान हो जाती है। "Berukhi" यानी वो ठंडापन, जो ना सिर्फ़ शब्दों में होता है बल्कि जज़्बातों में भी घुल जाता है। ये वही एहसास है जो रिश्तों की मिठास को खामोशी में तब्दील कर देता है।
इस ब्लॉग में हम आपके लिए लाए हैं कुछ बेहद गहराई से लिखी गई Berukhi Shayari in Hindi, जो उस दर्द को बयां करती हैं जब प्यार तो होता है, मगर उसका इज़हार नहीं। जब नज़दीकियाँ होती हैं, मगर दिलों में फासले पनपने लगते हैं। ये शायरी उन तमाम लोगों के लिए है जो आज भी किसी की बेरुख़ी को दिल में छुपाए बैठे हैं, और लफ़्ज़ों के ज़रिए अपने दर्द को दुनिया से कहना चाहते हैं।
अगर आपने भी कभी किसी की बेरुख़ी को सहा है, तो ये शायरी आपके दिल की आवाज़ बन सकती है।

जब जब मुझे लगा मैं तेरे लिए ख़ास हूँ तेरी बेरुखी ने ये समझा दिया मैं झूठी आस में हूँ !

अभी कमजोर हूँ तो कमजोर ही रहने दो यूँ बेरुखी से तो मैं भी पत्थर हो जाऊँगा!

नमक भी छिड़क कर देखा जख्मों पर तेरी बेरुखी ज्यादा दर्द देती है

पहाड़ियों की तरह खामोश है आज के संबंध और रिश्ते जब तक हम न पुकारे उधर से आवाज ही नहीं आती !

इतनी बेरुखी दिखा कर के तुझे क्या मिलेगा क्या तू रब है जो मरने के बाद मिलेगा !

कहाँ तलाश करोगे तुम दिल हम जैसा जो तुम्हारी बेरुखी भी सहे और प्यार भी करे!

तूँ माने या ना माने पर दिल दुखा तो है तेरी बेरुखी से कुछ गलत हुआ तो है !

मुझसे दुरिया बनाकर तो देखो फिर पता चलेगा कितना नजदीक हू में !

हमारी चाहत को आपने हमारी बेरुखी बना दी क्या भूल थी हमारी जो आपने यह सजा दे दी !

हमारी बेरुखी अब इस कदर बढ़ गई है तुमसे बात तो मुमकिन है पर हम कोशिश नहीं करना चाहते !

जब-जब मुझे लगा मैं तेरे लिए खास हूँ तेरी बेरुखी ने ये समझा दिया मैं झूठी आस में हूँ !

चाहते थे हम आपके अल्फाज बनना पर आपने तो हमारी बेरुखी चुन ली !

देखी है बेरुखी की आज हम ने इन्तेहाँ हमपे नजर पड़ी तो वो महफ़िल से उठ गए।

इस बेरूखी पे आपकी यूं आ गई हंसी आंखें बता रही हैं ज़रा सी हया तो है !

काश तुझे मेरी जरूरत हो मेरी तरह, और मैं तुझे नज़रअंदाज करूँ तेरी तरह.

हज़ार शिकवे कई दिनों की बेरूखी बस उनकी एक हँसी और सब रफा-दफा !

बेवक्त बेवजह बेसबब सी बेरुखी तेरी फिर भी बेइंतहा तुझे चाहने की बेबसी मेरी !

आदत हमारी कुछ इस तरह हो गई, उनकी बेरूखी से भी मुहब्बत हो गई.

कोई अनजान नहीं होता अपनी बेरूखी और खताओं से बस हौसला नहीं होता खुद को कटघरे में लाने का !

बहुत दर्द होता है जब आपको वो इंसान इग्नोर करें, जिसके लिए आप पूरी दुनिया को इग्नोर करते हैं.

तुम्हारी बेरूखी ने लाज रख ली बादाखाने की, तुम आंखों से पिला देते तो पैमाने कहाँ जाते।

इस क़दर जले है तुम्हारी बेरुख़ी से, के अब आग से भी सुकून सा मिलने लगा है !

काश वह समझते इस दिल की तड़प को, तो यूँ रुसवा ना किया होता, उनकी ये बेरूखी भी मंजूर थी हमें, बस एक बार हमें समझ लिया होता.

हजारों जवाब से अच्छी मेरी ख़ामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रख ली।

तेरी ये बेरूखी किस काम की रह जायेगी आ गया जिस रोज अपने दिल को समझाना मुझे !

कभी ऐसी भी बेरूखी देखी है हमने, कि लोग आप से तुम तक और तुम से जान तक फिर जान से अनजान तक हो जाते हैं.

कुछ बेरुखी से ही सही पर देखते तो हो ये आपकी नफरत है कि एहसान आपका !

भरी सख्ती मिजाज़ों में नहीं पैदायशी हैं हम किसी की बेरूखी झेली पिघल के फिर जमे हैं हम !

देख कर बेरूखी उनकी इस कदर आज, ना जाने क्यों आँखें हमारी नम हो गई, दरवाजें तो पहले ही बंद हो गये थे उनके, मगर अब तो खिड़कियाँ भी बंद हो गई.

तेरी बेरूखी को भी रूतबा दिया हमने, प्यार का हर फ़र्ज अदा किया हमने, मत सोच कि हम भूल गयें है तुझे, आज भी खुदा से पहले तुझे याद किया हमने.

आज देखी है हमनें भी बेरुखी की इन्तेहाँ हम पर नजर पड़ी तो वो महफ़िल से उठ गए !

तूँ माने या ना माने पर दिल दुखा तो है तेरी बेरुखी से कुछ गलत हुआ तो है !