Aadmi Shayari, Status, and Images in Hindi

देखें क़रीब से भी तो अच्छा दिखाई दे इक आदमी तो शहर में ऐसा दिखाई दे

आदमी होता है माहौल से अच्छा या बुरा जानवर घर में रखे जाएं तो इन्सान से हैं

हर आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी, जिसको भी देखना बड़े गौर से देखना!

घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे, बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला!

इसी लिए तो यहाँ अब भी अजनबी हूँ मैं, तमाम लोग फ़रिश्ते हैं आदमी हूँ मैं

दुनिया का तो पता नहीं आदमी एक बहाना है

देवताओं का ख़ुदा से होगा काम आदमी को आदमी दरकार है

तेरी मर्ज़ी थी तू चाहे जो बना देता मेरा लेकिन तूने आदमी तोड़ कर पत्थर नहीं बनाना था

फिरता है कैसे-कैसे सवालों के साथ वो उस आदमी की जामातलाशी तो लीजिए

आदमी बुलबुला है पानी का, क्या भरोसा है ज़िंदगानी का!

जानवर आदमी फ़रिश्ता ख़ुदा, आदमी की हैं सैकड़ों क़िस्में!

क्या डरें हम भूत-डायन-सी किसी भी बद-बला से आदमी से ही नहीं महफ़ूज़ है जब आदमी अब!

आदमी आदमी से मिलता है, दिल मगर कम किसी से मिलता है भूल जाता हूँ मैं सितम उस के, वो कुछ इस सादगी से मिलता है!

सब से पुर-अम्न वाक़िआ ये है आदमी आदमी को भूल गया

फ़रिश्ते से बढ़कर है इंसान बनना, मगर इसमें लगती है मेहनत ज़्यादा!

यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं, मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे!

ख़ूबसूरत है सिर्फ़ बाहर से ये इमारत भी आदमी सी है

ख़ुदा बदल न सका आदमी को आज भी होश, और अब तक आदमी ने सैकड़ों ख़ुदा बदले।

आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए आदमी मज़दूर है राहें बनाने के लिए

गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया, होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया

फूल कर ले निबाह काँटों से आदमी ही न आदमी से मिले

न जाने बाहर भी कितने आसेब मुंतज़िर हों अभी मैं अंदर के आदमी से डरा हुआ हूँ

एक आंधी जिसे ले जाए उड़ा कर पल में आदमी रेत के टीलों की तरह होता है

मैं आदमी हूँ कोई फ़रिश्ता नहीं हुज़ूर, मैं आज अपनी ज़ात से घबरा के पी गया