Aadat Shayari, Status, and Images in Hindi

अपनी इस आदत पे ही इक रोज़ मारे जाएँगे कोई दर खोले न खोले हम पुकारे जाएँगे!

आदत मेरी अंधेरों से डरने की डाल कर, एक शख्स मेरी जिंदगी को रात कर गया।

अपनी आदत कि सब से सब कह दें शहर का है मिज़ाज सन्नाटा!

किस तरह करे खुद को तेरे प्यार के क़ाबिल हम, हम अपनी आदतें बदलते है तो तुम शर्ते बदल देते हो।

एक आदत सी बन गई है तू और आदत कभी नहीं जाती

मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँ नहीं आता मैं क्या करूँ के तुझे देखने की आदत है

ये काम दोनों तरफ हुआ है उसे भी आदत पड़ी है मेरी

मुझे तन्हाई की आदत है मेरी बात छोड़ें ये लीजे आप का घर आ गया है हाथ छोड़ें ।

सिगरेट जैसी एक आदत मान बैठा हूँ तुम्हें ये भी मुझे मालूम है आदत नहीं अच्छी मेरी

अजब शायर की आदत है कि जब बीड़ी जलाने को किसी से माँगी माचिस तो जला कर जेब में रख ली!

सबसे हँसकर मिलना उसकी आदत थी मुझको लगता था मेरी दीवानी है

बड़ी तब्दीलियां लाया हूँ, मैं अपने आप में लेकिन, बस तुमको याद करने की, वो आदत अब भी बाकी है।

किसी की आदत हो जाना, मोहब्बत हो जाने से भी ज्यादा खतरनाक है।

अपनी जिंदगी में किसी इंसान को, अपनी आदत न बनाना, क्योंकि जब वो बदलता है, तो उससे ज्यादा खुद पर गुस्सा आता है।

तुझ से बिछड़ा तो मर न जाऊं कहीं तू मुहब्बत नहीं है, आदत है

यह आदत भी ना कितनी जल्दी हो जाती है, पर छोड़ने का वक्त आता है तो आसानी से छूटती नहीं।

उस की आदत है मेरे बाल बिगाड़े रखना उस की कोशिश है किसी और को अच्छा न लगूँ ।

बच्चे मेरी गली के पढ़ने लगे है गज़लें कैसे लगी ये आदत ये कौन जानता है

ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी, मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी।

उसे जन्नत कहाँ से रास आये जिसे दोज़ख़ की आदत लग चुकी है

मैंने तेरा बहुत हो ना चाहा लेकिन अफसाने ही रहे, तेरे होठों पर हमेशा बहाने थे और बहाने ही रहे।

उस बेवफ़ा का करते हो तुम ज़िक्र बार बार आदत 'सईद' है ये तुम्हारी बहुत बुरी

क़सम देने की आदत बन गई थी जब क़सम खा कर ही बातें सच बताते थे

दर्द सहने की इतनी आदत सी हो गई है, कि अब दर्द ना मिले तो बहुत दर्द होता है।

छोड़ दूँ उसको भला मैं किस तरह से वो मोहब्ब़त है मिरी, आदत नहीं है

बहुत कुछ बदला हैं मैने अपने आप में, लेकिन, तुम्हें वो टूट कर चाहने की आदत अब तक नहीं बदली।

समय के साथ तो हर एक आदत छूट जाती है हमें तुम याद रक्खोगे ग़लतफ़हमी हमारी है

में छोड़ तो सकता हूँ लेकिन छोड़ नहीं पाता उसे, वो मेरी बिगड़ी हुई आदत की तरह है।